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अशक्तता पेंशन:-

यदि सेवा 10 वर्ष या उससे अधिक है तथा विकलांगता न ही सैन्य सेवा के द्वारा अरोप्य है और न ही उसमें अपवृद्धि हई है विकलांगता पेंशन दावे अस्वीकृत होने पर अशक्तता पेंशन स्वीकृत होगी जो विकलांगता पेंशन के सेवा अंश के बराबर है ।

अशक्तता उपदान ः-सेवा यदि 10 वर्ष से कम है तथा आई.ड़ी. अस्वीकृत कर दी गई तो अर्हक सेवा के पूर्ण किए गए प्रयेक छमाही अवधि अर्धमासिक वेतन के बराबर अशक्तता उपदान का भुगतान किया जायेगा।

विकलांगता अंश के एवज में एक मुश्त क्षतिपूर्ति:-

अफसर रैंक से नीचे के कार्मिक में यदि विकलांगता पाई जाती है तथा उसकी स्वीकृति के कारण हई सैन्य सेवा के द्वारा आरोप्य या अपवृद्धि तथा उनकी विकलांगता 20% या अधिक पर जीवनपर्यन्त के लिए स्वीकार किया गया है परंतु व्यक्ति को सेवा में बने रहने दिया गया है,तो वह ड़ी ई के पूँजीगत मूल्य के बराबर,ड़ी ई के एवज में एक मुश्त क्षतिपूर्ति का हकदार होगा एक बार ड़ी ई के एवज में भुगतान होने पर सेवामुक्ति के पश्चात उक्त विकलांगता के लिए आगे कोई हकदारी मान्य नहीं होगी ।

ड़ी ई की गणना हेतु विकलांगता आरंभ होने के समय पर धारित पद तथा अगले जन्म तिथि पर उम्र की गणना विकलांगता होने की तिथि चिकित्सा बोर्ड़ द्वारा संस्तुति किए गए आय में लो़िड़ग यदि कोई है सम्मिलित है ।

पश्च सेवा मक्त मामलों में विकलांगता अंश
व्यक्ति जो स्वयं के अनुरोध पर पेंशन/उपदान सहित सेवा से सेवानिवृत/सेवामुक्त हो जाता है परंतु उसके सेवामुक्त होने के 10 वर्ष के भीतर ऐसी बिमारी से पी़ड़ित हो जाता है जो कि सैन्य सेवा के आरोप्य या अपिवृद्धि स्वीकृत की गई तो उन्हें स्वीकृत प्रतिशत की उपयुक्त दर पर विकलांगता अंश स्वीकार किया जा सकता है । इसके अतिरिक्त अंतिम रैंक पर पेंशन/उपदान देय है ।

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